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सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय में 18वाँ पदविदान समारोह गरिमामय रूप से संपन्न

सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय में 18वाँ पदविदान समारोह गरिमामय रूप से संपन्न


सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय में दिनांक 20 जनवरी 2026 को 18वाँ पदविदान समारोह अत्यंत भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर आचार्य देवव्रत, गुजरात राज्यपाल, की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा और भी बढ़ा दी।


शैक्षणिक गरिमा और वैदिक परंपरा का अनुपम संगम


समारोह के दौरान वेद–मंत्रोच्चारण एवं अकादमिक मर्यादा के साथ विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण स्नातक, स्नातकोत्तर तथा शोधार्थी विद्यार्थियों को विधिवत् पदवियाँ प्रदान की गईं। यह अवसर विद्यार्थियों के लिए केवल शैक्षणिक उपलब्धि का नहीं, बल्कि जीवन–मूल्यों एवं उत्तरदायित्वों के संकल्प का भी प्रतीक बना।


राज्यपाल का प्रेरक संदेश


राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी ने अपने उद्बोधन में संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान–परंपरा, नैतिक शिक्षा तथा जीवन–संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे संस्कृत को केवल अध्ययन–विषय न मानकर जीवन–दर्शन के रूप में अपनाएँ और समाज के सर्वांगीण विकास में योगदान दें।


संस्कृत शिक्षा की सुदृढ़ परंपरा


सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय वेद, वेदांग, दर्शन, योग, साहित्य एवं भारतीय शास्त्रीय परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में निरंतर अग्रसर है। 18वाँ पदविदान समारोह इस तथ्य का सजीव प्रमाण रहा कि विश्वविद्यालय परंपरा और आधुनिकता के समन्वय से राष्ट्रहित में कार्य कर रहा है।


नवपदवीधारियों के लिए नव आरंभ


यह समारोह विद्यार्थियों के लिए नवीन दायित्वों, अनुसंधान–संकल्पों और राष्ट्रसेवा के पथ पर अग्रसर होने का शुभ अवसर सिद्ध हुआ। विश्वविद्यालय परिवार को पूर्ण विश्वास है कि ये नवपदवीधारी छात्र–छात्राएँ समाज, संस्कृति और ज्ञान–परंपरा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगे।

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